भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने यू. ए. ई. में ईरान की भर्त्सना की। क्या मोदी कल को अमेरीका के कहने पर हमारे देश के परमाणु हथियार कार्यक्रम भी बंद करेंगे और अरब देशों की तरह अमेरीका के सैन्य अड्डे भी भारत में स्थापित करेंगे? अमेरीका ने तीसरा विश्व युद्ध शुरू किया हुआ है, जो कहीं टैरिफ, कहीं राज प्रमुखों को अगवा करना और कहीं सीधा हमला करना है। पर सिर्फ यह बात स्वीकार नहीं की जा रही कि अमेरिका ने जर्मनी की हिटलर शाही की तर्ज पर तीसरा विश्व युद्ध चलाया हुआ है, और इसके मद्दे नज़र, अमेरीका ने भारतीयों को अमानवीय तरीके से डिपोर्ट करके भारत को नीचा दिखाया, रुसी तेल के व्यापार की रोक और टैरिफ से हमले किए हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री की ईरान की भर्त्सना यही बताती है कि अब हमारी कूटनीति अमेरिका के दबाव में बन रही है और आगे जाकर अमेरीका हमारी विदेश नीति, अर्थ नीति, व्यापार नीति, सैन्य नीति, और यहां तक की घरेलू नीति और संवैधानिक मूल्यों को भी अपने हितों के लिए प्रभावित करेगा। मोदी का इस प्रकार समर्पण करना राष्ट्रीय हित में नहीं है। एक मित्र देश कभी बाध्य नहीं करता, जैसे रूस हमारा मित्र देश है। इसलिए, मोदी को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करना चाहिए। यदि वे देश के लोगों को यह कह सकते हैं कि उपभोग कम करो, तो अमेरीका से भी कर सकते हैं कि हमले नहीं करो। और हमारे पूर्व प्रधानमंत्रियों ने यह किया है। इसलिए मोदी सही कूटनीतिक मार्ग चुनें जो किसी अन्य देश के दबाव में न हो। – निखिल सबलानिया
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