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अछूत और ईसाई धर्म 10 प्रतियां Achhut aur Isayee Dharm 10 Pratiyan Untouchables and Christanity

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प्राक्कथन

वैसे तो डॉ. भीमराव आंबेडकर जी के बहुत से लेखों का अनुवाद और प्रकाशन किया जा चुका है परन्तु इस लेख को मैंने अभी तक कहीं हिंदी में नहीं देखा था। जब मैंने यह लेख पढ़ा तो इस लेख में दी गई बातों को जान कर मुझे बहुत हैरानी हुई कि इतना महत्वपूर्ण लेख अब तक सामने क्यों नहीं आया। इस लेख में भारत में ईसाई धर्म के प्रचार से लेकर भारत के ईसाईयों की समस्याओं पर जो बातें लिखी हैं वह न केवल एक ऐतिहासिक तथ्य ही है बल्कि वर्तमान का सत्य भी है। आज भी भारत में ईसाईयों को और विशेषकर अंग्रेजों को बुरी दृष्टि से देखा जाता है।  पर यह इतिहास नहीं बताया जाता कि ईसाई मिशनरियों ने भारत के लोगों को कितना फायदा पहुँचाया है। यह लेख केवल भारत के संदर्भ में ही नहीं है बल्कि विश्व इतिहास का भी एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है। कोई अचम्भा न हो कि भविष्य में यह लेख स्कूल या कॉलेजों में इतिहास के पाठयक्रम का हिस्सा बन जाए। पुस्तक के रूप में यह मेरा पहला अनुवाद है। हालाँकि मैं इससे पहले टी.वी. के कार्यक्रमों का अनुवाद कर चुका हूँ। इसे अनुवाद करने में मुझे कई वर्ष लग गए। असल में दो या तीन पृष्ठ अनुवाद करने पर ही दिमाग बहुत थक जाता था। मैंने अनुवाद को चालू काम की तरह नहीं करना चाहता था। साथ ही मैंने यह देखा है कि डॉ. आंबेडकर जी की पुस्तकों के अन्य अनुवादों में कई जटिल और भ्रामक शब्दों को मिला दिया जाता है जिससे कि पाठक को समझने में कठिनाई होती है। इसलिए मैंने इस पुस्तक में सरल शब्दों के साथ-साथ शब्दों के एक से अधिक अर्थों को ब्रैकेट में लिखा है जिससे कि पाठक को यह पुस्तक समझ में आ जाए। एक और बात जो कि पाठकों को ध्यान में रखनी है वह यह है कि इस पुस्तक का अनुवाद करते समय डॉ. आंबेडकर जी के वाक्यों को ज्यों-का-त्यों अनुवाद करने का पूर्ण प्रयत्न्न किया है। हालाँकि इससे कुछ जटिलता आती है पर इससे असली लेख के रूप में बदलाव नहीं आता। मुझे पूरा विश्वास है कि यह लेख लोगों को बहुत पसंद आएगा और अपने विचारों से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाएगा।

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यह डॉ. भीमराव आंबेडकर जी का लिखा एक ऐसा लेख है जिसेअंग्रेजी से हिंदी में अनुवादित किया है जिसका कि अभी तक अनुवाद नहीं हुआ था। यह लेख भारत के अछूतों की ईसाई धर्म में स्थिति और भारत में ईसाई धर्म और ईसाईयों की स्थिति से अवगत कराता है। यह न केवल डॉ. आंबेडकर जी का एक महत्वपूर्ण लेख है बल्कि इतिहास का भी एक अनमोल लेख है। यह लेख भारत में अंग्रेजी सरकार के इतिहास और ईसाई मिशनरियों के कार्यों पर भी बहुत प्रकाश डालता है। यह लेख हर भारतवासी को पढ़ने की जरुरत है। भारत के ईसाई समाज के लिए यह डॉ. आंबेडकर जी की अनमोल देन है। 

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