लेखक परिचय
श्याम सुन्दर सिंह समकालीन हिंदी के उन लेखकों में हैं जो साहित्य को केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और बौद्धिक जागरण का सशक्त उपकरण मानते हैं। वे समाज, इतिहास, दर्शन और भारतीय चिंतन पर गंभीर अध्ययन करने वाले स्वतंत्र शोधकर्ता भी हैं।
उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावाद, सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति है। वे मानते हैं कि किसी भी समाज की प्रगति अंधविश्वास, रूढ़ियों और जन्माधारित भेदभाव से मुक्त होकर ही संभव है। इसी कारण उनके लेखन का केंद्र सदैव मनुष्य, उसकी स्वतंत्रता, उसकी गरिमा और तर्कशील चेतना रही है।
श्याम सुन्दर सिंह का लेखन भारतीय समाज की जटिलताओं, जाति व्यवस्था, सामाजिक असमानता, धार्मिक पाखंड, शिक्षा, बहुजन इतिहास, स्त्री प्रश्न, किसान जीवन और लोकतांत्रिक मूल्यों जैसे विषयों को गहराई से स्पर्श करता है। वे इतिहास और परंपरा को आँख मूंदकर स्वीकार करने के बजाय उपलब्ध प्रमाणों, ऐतिहासिक स्रोतों और तार्किक विवेचना के आधार पर समझने और प्रस्तुत करने का प्रयास करते हैं। उनका विश्वास है कि प्रश्न करना ज्ञान की पहली शर्त है और तर्क किसी भी सभ्य समाज की सबसे बड़ी शक्ति ।
साहित्य की अनेक विधाओं में उनकी सक्रिय रुचि है। वे उपन्यास, शोधपरक पुस्तकें, जीवनी, बाल साहित्य, कॉमिक्स, कविता और सामाजिक लेख लिखते रहे हैं।
‘कबीर : मिथक से तर्क तक’ उनकी इसी वैचारिक यात्रा का एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव है। इस पुस्तक में उन्होंने कबीर के जीवन और विचारों के संबंध में प्रचलित मिथकों, लोककथाओं और परंपरागत धारणाओं का आलोचनात्मक परीक्षण करते हुए उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतों, सामाजिक संदर्भों और तार्किक विश्लेषण के आधार पर कबीर को समझने का प्रयास किया है। लेखक का उद्देश्य किसी आस्था का समर्थन या विरोध करना नहीं, बल्कि सत्य की खोज, ऐतिहासिक प्रामाणिकता और विवेकपूर्ण संवाद को प्रोत्साहित करना है।
श्याम सुन्दर सिंह का विश्वास है कि समाज को बदलने के लिए केवल कानून पर्याप्त नहीं होते; विचारों का परिवर्तन भी उतना ही आवश्यक है। यही कारण है कि उनकी लेखनी सामाजिक चेतना, वैज्ञानिक सोच और मानवीय मूल्यों को सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर सक्रिय है। उनके लिए लेखन केवल साहित्यिक कर्म नहीं, बल्कि एक नैतिक और सामाजिक दायित्व है-ऐसा दायित्व जो मनुष्य को भय से नहीं, बल्कि तर्क से; अंधविश्वास से नहीं, बल्कि ज्ञान से; और विभाजन से नहीं, बल्कि समानता और बंधुत्व से जोड़ता है।
– श्याम सुन्दर सिंह
संपर्क: ग्राम इटहा देवीपुर, पोस्ट रामनगर, मऊ, चित्रकूट (उ.प्र.) 210209
मो.: 9621914199, ईमेल: pmsssingh@gmail.com



