Best Seller

अंगूठा एकलव्य का (काव्य नाटक) कवि रानार्जुन राना angutha eklavya ka (kavya natak) kavi ranarjun rana

Availability: In stock

₹75.00

लेखक
भाषा हिन्दी
कवर
संस्करण
पृष्ठ
ISBN
Quantity :

लेखक परिचय

आदिवासी बाहुल्य चित्रकूट क्षेत्र पहाड़ी अंचल के गांव कारीगोही जिला सतना के एक किसान परिवार में 5 फरवरी, 1938 को जन्मे बहुमुखी प्रतिभा के धनी यशस्वी साहित्यकार जनकवि रानाजी पांच दशकों से अधिक समय से साहित्य साधनारत हैं। वे जमीन से जुड़े किसान कवि हैं। जो अपनी जनवादी कविताओं-रचनाओं में क्रांति के बीज बोता है। वे नित नवीन के खोजी और वैज्ञानिक सत्य के अन्वेसी हैं। परंपरा की लोक पर चलना और अलौकिकता पर विश्वास करना उन्हें कभी रास नहीं आया। उन्होंने अब तक कई महत्त्वपूर्ण कृतियां साहित्य भंडार को दी हैं। गीत, कविता, खण्ड काव्य, महाकाव्य, नाटक, व्यंग, इतिहास-पुरातत्त्व, समीक्षा, संपादन आदि उनकी साहित्यिक यात्रा के पड़ाव हैं, तो बौद्ध साहित्य, नारी और दलित विमर्श उनके प्रिय विषय हैं। वे उच्च कोटि के कवि ही नहीं, मानव संवेदनाओं के गहन ज्ञाता हैं, जो उनकी समस्त रचनाओं में देखा जा सकता है।

उनका रचनाकार नारी-दलित, बहुजन सर्वहारा वर्ण की पीड़ा को स्वर देता है और समता व सामाजिक न्याय हेतु संघर्ष को प्रेरित करता है।

– प्रकाशक

You may also like…

0 out of 5

उलगुलान बिरसा मुंडा और उनका आंदोलन

₹60.00
लेखक भाषा हिन्दी कवर संस्करण पृष्ठ ISBN
0 out of 5

रामायण में आदिवासियों के खिलाफ एक षड़यंत्र

₹200.00
लेखक भाषा हिन्दी कवर संस्करण पृष्ठ ISBN लेखक भाषा हिन्दी कवर संस्करण पृष्ठ ISBN
Loading...
0Shares