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प्राचीन धर्म संस्कृति का मोह क्यों? लेखक नाथूराम सिंह पटेल Pracheen Dharma aur Sanskriti ka Moh Kyo? by Nathuram Singh Patel

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लेखक नाथूराम सिंह पटेल
भाषा हिन्दी
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लेखक परिचय

नाम : नाथूराम सिंह पटेल

जन्म 5 जून 1940 प्रसिद्धपुर (चित्रकूट)

पता : बौद्ध एवं आंबेडकर साहित्य, प्रसिद्धपुर, पो. बछरन, चित्रकूट (उ.प्र.)

मोबाइल: 09919674010, 09918888585

प्रारंभिक जीवन से ही आपकी सामाजिक सुधार के कार्यों की ओर अभिरुचि रही है। 1961 में आपका चयन जिला विकास समिति में किया गया। प्रथम विश्व कृषि मेला, नई दिल्ली में तत्कालीन राष्ट्रपति महामहिम डॉ. राजेन्द्र प्रसाद द्वारा आपको सम्मानित किया गया। तत्कालीन मुख्यमंत्री उ.प्र. डॉ. संपूर्णानंद द्वारा आपको प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।

17 अप्रैल, 1990 को अपने सुपुत्र का विवाह विना मुहूर्त, बिना नेग दहेज के संपन्न किया। इसमें नेग दहेज के नाम पर एक पैसा नहीं लिया गया तथा बर्तन, कपड़े उपहार आदि भी नहीं लिए गए। वधू पक्ष तथा वर-पक्ष को समान सम्मान देकर कन्यादान प्रथा को अव्यावहारिक समझकर रोककर मात्र पाणिग्रहण करवाया गया। हाथ मिलाने या गले मिलने का चलन किया गया। उम्र में बड़े होने को सम्मान दिया गया न कि रिश्ते को। इस पिछड़े क्षेत्र में यह छोटा कार्य भी महत्वपूर्ण और उल्लेखनीय रहा।

13 मई, 1990 को पिता के देहावसान पर युगों से चली आ रही मृत्युभोज की कुरीति को तोड़कर तथा महापात्र को अनावश्यक आडंबरपूर्ण दान-दक्षिणा से दूर रखकर स्वयं बौद्धिक रीति का निर्वाह करके शुद्धि कर ली गई।

इस तरह विवाह तथा मृत्यु दोनों अवसरों की अंधपरंपराओं को तोड़कर सामाजिक सुधार का प्रशंसनीय कार्य मा. पटेल द्वारा किया गया। बहुजन समाज के जागरण अभियान में आपकी सक्रिय भागीदारी है। इस प्रकार समाज में फैली कुरीतियों, अंधविश्वास, पर्दाप्रथा, बाल-विवाह, मृतक भोज, मुहूर्तवाद आदि को दूर हटाकर बहुजन समाज विकास के लिए हर दम संलग्न रहते हैं।

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