कहानी संकलन बहिष्कृत गली सामाजिक सरोकारों और मानवीय संवेदनाओं की कहानियां लेखक श्याम सुन्दर सिंह Kahani Sankalan Bahishkrut Gali Samajik Sarokar aur Manviya Samvednaon ki kahaniyan by Shyam Sunder Singh
लेखकीय परिचय
श्याम सुंदर सिंह समकालीन हिंदी लेखन में सामाजिक सरोकारों, मानवीय संवेदनाओं और हाशिए पर खड़े लोगों के जीवन को अपनी रचनात्मक दृष्टि का केंद्र बनाने वाले लेखक हैं। उनके लेखन में गाँव की मिट्टी, खेतों की गंध, मजदूरों की थकान, गरीब परिवारों की छोटी-छोटी खुशियाँ, सामाजिक भेदभाव की पीड़ा और बेहतर जीवन की उम्मीद एक साथ दिखाई देती है। वे उन जीवन-स्थितियों को शब्द देने का प्रयास करते हैं, जो हमारे आसपास मौजूद होते हुए भी अक्सर साहित्य और समाज की मुख्य धारा में अनदेखी रह जाती हैं।
श्याम सुंदर सिंह के लिए कहानी केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि मनुष्य और समाज को करीब से देखने का एक रास्ता है। उनकी कहानियों के पात्र किसी कल्पित दुनिया से आए हुए असाधारण लोग नहीं हैं; वे हमारे आसपास के वही साधारण लोग हैं, जो खेतों में काम करते हैं, मजदूरी करते हैं, अभावों के बीच अपने बच्चों को पालते हैं, सामाजिक रूढ़ियों से जूझते हैं और फिर भी जीवन से हार नहीं मानते। उनके पात्रों की पीड़ा व्यक्तिगत होते हुए भी धीरे-धीरे एक व्यापक सामाजिक प्रश्न में बदल जाती है।
उनकी रचनात्मक दृष्टि का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि वे सामाजिक अन्याय को केवल बाहर से देखने के बजाय उसके भीतर मौजूद मानवीय जटिलताओं को समझने का प्रयास करते हैं। जाति, गरीबी, श्रम, असमानता, सम्मान, शिक्षा, अधिकार और स्वतंत्रता जैसे प्रश्न उनके लेखन में किसी नारे की तरह नहीं, बल्कि पात्रों के जीवन-अनुभवों के माध्यम से सामने आते हैं। यही कारण है कि उनकी कहानियों में सामाजिक सरोकार के साथ-साथ मानवीय संवेदना भी गहरी दिखाई देती है।
श्याम सुंदर सिंह की भाषा सहज, सरल और जनजीवन के करीब है। वे कठिन विषयों को भी ऐसी भाषा में प्रस्तुत करना पसंद करते हैं, जिसमें गाँव और आम आदमी की आवाज सुनाई दे। उनके लिए साहित्य का महत्व तभी है, जब पाठक कहानी पढ़ते हुए केवल घटनाओं को न देखे, बल्कि पात्रों के दुख, संघर्ष, सपनों और सवालों को भी महसूस करे।
यह कहानी-संकलन इसी लेखकीय दृष्टि का विस्तार है। इसमें शामिल कहानियाँ अलग-अलग पात्रों और परिस्थितियों की कथाएँ होते हुए भी एक अदृश्य सूत्र से जुड़ी हैं-मनुष्य की गरिमा और बराबरी की तलाश। कहीं कोई मजदूर अपने हिस्से की रोटी और सम्मान के लिए संघर्ष करता है, कहीं कोई व्यक्ति सामाजिक भेदभाव के सामने खड़ा होता है, कहीं गरीबी किसी परिवार के सपनों को सीमित करती है और कहीं वर्षों से चली आ रही व्यवस्था किसी इंसान के जीवन पर अपना गहरा असर छोड़ती है।
लेखक का विश्वास है कि कहानी समाज को बदलने का दावा भले न करे, लेकिन वह समाज के सामने एक आईना जरूर रख सकती है। उस आईने में जब कोई पाठक किसी दूसरे का चेहरा देखते-देखते अचानक अपना चेहरा देखने लगे, तो कहानी अपना काम कर चुकी होती है।
श्याम सुंदर सिंह की कहानियाँ इसी उम्मीद के साथ लिखी गई हैं-कि जिन आवाज़ों को लंबे समय से दबा दिया गया है, उन्हें सुना जाए; जिन चेहरों को हाशिए पर धकेल दिया गया है, उन्हें देखा जाए; और जिन सवालों से समाज लगातार बचता रहा है, उनके सामने एक दिन ठहरकर सोचा जाए।
– श्याम सुन्दर सिंह
सम्पर्क : ग्राम इटहा देवीपुर, रामनगर, चित्रकूट, उ.प्र. 210209
मो.: 9621914199, ई-मेल: pmsssingh@gmail.com

