आजकल, भारद्वाज गोत्र, लगाने वाले खुद को ब्राह्मण कहते हैं। पर विष्णु पुराण के 19 वें अध्याय में बताया है कि, क्षत्रिय कुल के राजा दुष्यंत का पुत्र हुआ भरत, जिसका पुत्र हुआ भारद्वाज (दूसरा नाम वितथ था)। भारद्वाज का पुत्र भवनमन्यु हुआ जिसके पुत्रों में एक हुआ गर्ग। गर्ग के पुत्र सिनी के वंशज गागर्य और सैन्य, जो जन्म से क्षत्रिय होने पर भी ब्राह्मण बन गए। यह संदर्भ बताता है कि वर्ण या जाति कोई जन्म आधारित नहीं थी। पर अफसोस कि आज लोगों को अपना इतिहास और अपने ग्रंथ ही नहीं पता और वे वर्ण या जातिवाद में खुद को लपेटे रहते हैं। – निखिल सबलानिया
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