खेलों का धन बैंकों में फिक्स डिपाॅसिट क्यों? – निखिल सबलानिया

भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) ने एकसौ तीन (103.16) करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम को कई वर्षों की फिक्स्ड डिपाॅसिट भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में जमा करने के लिए बैंकों से कोटेशन मांगी है। मैं पूछना चाहता हूं कि जब हाॅकी की राष्ट्रीय टीम को ओडिशा फंडिंग कर रही है, फुटबॉल का हाल खराब है, स्कूल स्तर पर जिमनास्टिक्स, स्विमिंग और खेलों का कोई इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है और कम आय वर्ग के बच्चों को खेलों में लाने की कोई योजना नहीं है, तो धन को खर्च करो, क्योंकि यही असली इनवेस्टमेंट है कि हमारे देश में खेल और सुधरे, न कि पैसे से पैसा बनाया जाए। यह सिर्फ एक संस्थान नहीं है। कई संस्थानों ने ऐसा किया है, कि जो धन उनको दिया गया, उसे कामों पर खर्च न करके SBI में फिक्स डिपाॅसिट कर दिया गया है। डाॅ. अम्बेडकर फाउंडेशन ने भी यही किया। क्या यह केंद्रीय सरकार के निर्देश या कानून के तहत हो रहा है? क्या यह इसलिए हो रहा है कि पूंजीपतियों को जनता के लिए लगने वाले धन को बटोर कर बांट दिया जाए? मोदी सरकार को इसका जवाब देना चाहिए कि ऐसा क्यों हो रहा है।- निखिल सबलानिया

निखिल सबलानिया द्वारा अनुवादित और डॉ. आंबेडकर जी की लिखित, उनके जीवन और कार्यों पर, उनकी सचित्र जीवनी, कार्ल मार्क्स की लिखित, बौद्ध धम्म, राजस्थान के बौद्ध इतिहास व दलित चिंतन, संविधान चर्चा सहित 10 पुस्तकें

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