योगी आदित्य नाथ, हिंदुओं का नहीं. बल्कि राजपूतों और पूंजीपतियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। एक परंपरागत शोषक है और दूसरा आधुनिक भक्षक है। एक उनका अभिमान है और दूसरा उनकी मजबूरी है। हिंदुत्व, केवल एक राजनैतिक उपकरण है, उद्देश्य नहीं है। राजपूत काल में कभी हिंदुओं में समानता स्थापित नहीं हुई। आधुनिक काल में हिंदू पूंजीपति ही हिंदुओं का शोषण और भक्षण करते हैं। पर इन प्रमुख बातों को हिंदुत्व की राजनीति का केन्द्र बनाने की जगह मुद्दा भटका दिया जाता है और राजनीति के केंद्र को मुसलमानों पर केंद्रित कर दिया जाता है। यह हिंदुओं का फोकस (ध्यान) खुद से हटा कर मुसलमानों पर शिफ्ट कर देता है। इसकी आड़ में परम्परागत शोषक हिंदू अपनी यथा स्थिति और संपति कायम रखता है और पूंजीपति हिंदू विकसित होता है। पर करोडों हिंदू राजनीति के केंद्र से पृथक (अलग) कर दिए जाते हैं। राजनीति से हिंदुओं को अलग करना ही हिंदुत्व की राजनीति है। न नौ मन तेल होगा, और न राधा नाचेगी। न हिंदू अपने अधिकारों के प्रति सजग होंगे और न समानता की बात ही होगी। यह गहरी बात है। पर जब बीएसपी आरक्षण, समानता, मजदूर वर्ग और पिछड़े समाज की बात करती है, तो ये है असली हिंदुत्व की राजनीति। क्योंकि ये राजनीति का फोकस मुसलमानों से हटा कर करोड़ों हिंदुओं पर शिफ्ट कर देती है। इससे राजनीति का केंद्र मुसलमानों से हट कर हिंदुओं की राजनीति पर शिफ्ट हो जाता है। मुसलमान एक समृद्ध, मजबूत और समझदार वर्ग है। उन्हें राजनीति की जरूरत उतनी नहीं जितनी हिंदुओं को है। राजनीति कमजोर को मजबूत बनाने का उपकरण है। हिंदू कमजोर हैं। पर योगी आदित्यनाथ वाली हिंदुत्व की राजनीति हिंदुओं को भ्रमित और उलझाए रखने वाली अंतहीन राजनीति है, जिसमें हिंदू अनंत काल तक पिसते चले जाएंगे। जबकि, बीएसपी की राजनीति सीधी और स्पष्ट है, कि कमजोर हिंदुओं को मजबूत करो। बीएसपी वाली हिंदुत्व की राजनीति से हिंदुओं का जल्द सशक्तिकरण होगा। इस बात को सभी हिंदुओं को समझना चाहिए। पर चूंकि हिंदू एक मानसिक रूप से भी दुर्बल समाज है, इसलिए उन्हें राजनीति समझ नहीं आती। और इस नासमझी के कारण वे हिंदुत्व की राजनीति करने वालों द्वारा उन्हीं से मूर्ख बना दिए जाते हैं, जिन्होंने अपना उल्लू सीधा करने के लिए, एक हजार साल देश और हिंदुओं को गुलाम रहने दिया। हिंदुओं का उद्धार हिंदू सशक्तिकरण में है, न कि मुसलमानों से टकराव में। और हिंदू सशक्तिकरण का ही काम डाॅ. भीमराव आंबेडकर जी ने शुरू किया था जिसे आज बहुजन समाज पार्टी (BSP) कर रही है। इसलिए सही हिंदुत्व की राजनीति को ही चुनें। जैसे सिर्फ चोला ओढ़ने से कोई साधु नहीं बन जाता, ऐसे ही हिंदू नाम लेने से कोई सभी हिंदुओं का शुभचिंतक नहीं बन जाता। – निखिल सबलानिया Nikhil Sablania
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