मायावती जी की तुलना किसी युवा नेता से करना सही नहीं – निखिल सबलानिया

आजकल मायावती जी की तुलना अन्य नेताओं से की जा रही है कि, फलां नेता उत्पीड़ित जनों के पास जाते हैं, पर मायावती जी नहीं जाती। परन्तु, ऐसा कहने वाले यह भूल जाते हैं कि, मायावती जी ने उस समय सड़को, मोहल्लों और गलियों में संघर्ष किया है जब देश की ज्यादातर औरतें गृहलक्ष्मी या गृहशोभा पढ़ कर परिवार की सुरक्षा में अपने नारीत्व के नैसर्गिक स्वरूप का आनंद लेती थी। चार बार मुख्यमंत्री बनने के बाद भी न सिर्फ मायावती जी कई बार पीड़ित परिवार से मिलने खुद जाती हैं, बल्कि, अपने नेताओं को भेजती हैं। पर वह दिखावे की राजनीति नहीं करती क्योंकि उन्होंने काम करके दिखाया है और लोगों को उन पर भरोसा है। किसी युवा नेता से मायावती जी की तुलना सही नहीं, जबकि उस युवक को खड़ा करने में किसी बहुजन विरोधी पार्टी का हाथ नज़र आ रहा हो और न उसने एक बार भी प्रदेश को संभाला हो। पर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि, बहुजन समाज पार्टी, किसी भी नेता से अधिक महत्वपूर्ण है। पार्टी ने सारे भारत में वंचित वर्गों को राजनीति सिखाई और अन्य दल भी बीएसपी के सिद्धांतों की नकल कर रहे हैं। बहुजन समाज पार्टी भारत के लोगों और आम लोगों का मजबूत किला है जो साधारण जनों की नीतियों को राष्ट्रीय नीतियों का हिस्सा बनाता है। पार्टी किसी धन्ना सेठ की पार्टी नहीं है और न ही सामंतवादियों की पार्टी है। इसलिए बीएसपी देश के लिए जरूरी है। इससे जुड़े नेता डाॅ. भीमराव आंबेडकर जी को पढ़ कर उनके बताए लोक हित के मार्ग पर चलते हैं। इसलिए यहां कोई नेताओं के व्यक्तितव की तुलना और टकराव का विषय नहीं है। कोई भी राजनीति में हाथ आजमाने के लिए स्वतंत्र है, पर साथ ही लोग भी राजनीतिक समीक्षा और निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है कि किस दल के साथ जल्दी सत्ता में पहुंच सकते हैं और कौनसा दल उनको और उनके भविष्य के लिए बेहतर है। – निखिल सबलानिया

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