आंदोलन समाप्त नहीं, बल्कि शुरू हुआ है – निखिल सबलानिया

मेरे एक दोस्त ने एक साल पहले पूछा था, “यार वहां पर कोई क्रांति नहीं होती है?” मैंने कहा कि, यार! हमारे भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का जो अध्ययन मैंने किया है, उसके आधार पर मुझे यह पता लगाया था, कि जो पाकिस्तान का निर्माण हुआ, वह तो ब्रिटिश सरकार के द्वारा किया गया था ताकि भारत को कमजोर करो। पर उससे पहले भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में सभी लोगों ने अपनी एकता का परिचय दिया था। आजादी के बाद से हमारे देश को तोड़ने के बहुत मौके आए, लेकिन जब-जब किसी ने हमारे देश को तोड़ना चाह तो, हमारे देश के सभी लोगों ने एक होकर उसको मुंह तोड़ जवाब दिया और आगे भी यही करेंगे।“ मैंने अपने दोस्त को यह विश्वास दिलाया था, कि यह हमारे देश का चरित्र है, कि यह देश कभी टूट नहीं पाएगा और एक दिन इस देश के लोग एक होकर जवाब देंगे। मैं मानता हूं कि मौजूदा प्रोटेस्ट कांग्रेस द्वारा प्रायोजित थी, लेकिन लोगों को एक मौका चाहिए था और कांग्रेस ने वह मौका उत्पन्न किया। पर यह भारत के सभी लोग थे जो अपने धार्मिक, जातिवादी और राजनीतिक मतभेदों को त्याग कर, एक होकर इस आंदोलन को सफल बनाकर भारत का मान और सम्मान रखा। पर अलग-अलग राज्यों में युवाओं की जो गिरफ्तारियां की गई हैं, जबतक उन्हें छोड़ नहीं जाता और उन पर सारे केस वापस नहीं लिए जाते हैं, तब तक आंदोलन चलना चाहिए। साथ ही सरकार द्वारा यह गारंटी भी आनी चाहिए कि अगले एक वर्ष में –

1. आगे से फेस रिकॉग्निशन कैमरे कहीं भी नहीं लगाए जाएंगे और इसका कानून बनेगा,

2. देश की बात कहने पर कोई भी सोशल मीडिया का अकाउंट ब्लॉक नहीं किया जाएगा और इस पर भी कानून बनेगा,

3. कॉलेज स्कूल एवं विश्वविद्यालय में कहीं भी देश के छात्रों को प्रोटेस्ट करने के लिए कोई भी रोक नहीं लगेगी और इसका कानून बनेगा,

4. सरकारी कर्मचारियों को भी प्रोटेस्ट में भाग लेने की अनुमति होनी चाहिए और इसके बाद उनको चुनाव लड़ने की भी अनुमति होनी चाहिए और इसके विरुद्ध कानून समाप्त होने चाहिए,

5. देश में सभी गौ रक्षक दलों को बैन किया जाना चाहिए, और इस तरह के अपराधों के लिए अलग से कानून बनाकर, उन्हें भी गंभीर अपराधों में डालकर उनके लिए कड़ी सजा होनी चाहिए, और गाय काटने पर बने सख्त कानूनों को हटा देना चाहिए,

6. भारत के भीतर जो चीन ने घुस आया है, उसे बाहर निकालें,

7. मणिपुर में होने वाले संघर्षों के पक्के समाधान निकालें,

8. अग्नि वीर योजना को खत्म करें,

9. सरकारी नौकरियों में कॉन्ट्रैक्ट बेसिस खत्म करके पक्की नौकरी दें,

10. बड़ी कंपनियों में न्यूनतम वेतन पचास हजार रूपये प्रति माह प्रतिमा करें,

11. किसी भी बड़ी कंपनी के लिए यह कानूनी बाध्यता हो, कि वह अपने यहां पर मजदूर यूनियन बनाएं, और जो इन कंपनियों के लिए अन्य काम करते हैं, जैसे कि फैब्रिकेशन, ट्रेडिंग, डिस्ट्रीब्यूशन, ट्रांसपोर्ट, आदि, उनकी भी यूनियन बनाना उस कंपनी के लिए बाध्य हो जिस कंपनी के साथ वे जुड़े हुए हैं,

12. सरकारी भूमि पर जो भी अब तक लोगों के आवासीय मकान बने हैं, उनको अगले 30 साल तक न तोड़ने और इस बीच उनके लिए और उनकी सहमति से कहीं और मकान बनाने की गारंटी दें,

13. स्कूल और कॉलेज के दाखिले के साथ-साथ नौकरियों के दाखिले में भी न्यूनतम योग्यता की उत्तीर्ण की गई श्रेणी के नंबरों के आधार पर प्रवेश दें, न कि कोई प्रवेश परीक्षा रखें और शिक्षा का प्रमुख मीडियम सभी स्कूलों में एक ही करें, या तो इंग्लिश या स्थानीय भाषा,

14. सभी सरकारी नौकरियों में रिक्त स्थानों को अगले 100 दिन के भीतर भरें,

15. रक्षा, तेल, ऊर्जा, और अंतरिक्ष विज्ञान से संबंधित संस्थाओं का निजीकरण न करें और जो हो गया है उसका राष्ट्रीयकरण करें,

17. पेट्रोल वह डीजल के वाहनों की अवधि बढ़ाएं और सस्ते दामों पर तेल व गैस उपलब्ध हो,

18. यह कानून बनाएं कि देश में कोई भी नेता या अफसर या अधिकारी का बच्चा देश से बाहर वह शिक्षा को लेने के लिए नहीं जाएगा जो देश में उपलब्ध है,

19. एक एंटी डायनेस्टी (अवांशिक) कानून भी बनाएं कि जो एक बार मंत्री, सांसद, विधायक बन जाता है, उसकी अगली तीन पीढ़ी तक कोई इन पदों पर नहीं आएगा और न ही उनके रहते हुए उनका कोई बच्चा या सगा ऐसा बिजनेस करेगा जिससे कि कोई सरकारी संस्था निजी क्षेत्र में तब्दील होती हो,

20. सरकार के जिन मौजूदा मंत्रियों के बच्चों को विदेशों में फंडिंग मिली है, इसकी एक्सप्लेनेशन भी वह मंत्री पूरी तरह से लिखित रूप में सार्वजनिक करें कि क्यो, कहाँ से और कितनी मिली है,

21. हाल ही में यू ए ई को आरबीएल बैंक की साठ प्रतिशत हिस्सेदारी जो दी गई है और यू ए ई की अडानी समूह में जो इन्वेस्टमेंट हुई है, उस पर सरकार बताएं कि क्या इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को कोई नुकसान है या नहीं है और आखिर सरकार की ऐसी क्या कमियां है कि बड़ी कंपनियों को सरकारी क्षेत्र से निजी क्षेत्र में तब्दील किया जा रहा है?

22. आयुष्मान योजना की जगह पर सरकार खुद के अस्पताल बनाएं और खुद की दवाइयां और सामान की मैन्युफैक्चरिंग करें,

23. भारत के सभी सरकारी स्कूलों में खेलों का इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेलप करें जिससे एक गरीब का बच्चा भी विंबल्डन में खेलने जाए और फुटबॉल जैसे खेलों में भारत को विश्व स्तर पर लेकर जाएं,

24. सरकारी आवासीय योजनाओं की कीमत मौजूदा कीमत से 70% कम करें,

25. वाहनों पर जीएसटी 2% से ज्यादा नहीं होना चाहिए,

26. खाद्य सामग्री, रेस्तरां, आदि, एवं काॅपियों, रजिस्टर और स्टेशनरी से जीएसटी हटाया जाए,

27. देश को प्लास्टिक मुक्त करने के लिए ठोस कदम उठाए,

28. सरकारी स्कूलों के भोजन में, जो बच्चे मांसाहारी हैं, उन्हें उन्हें प्रतिदिन, जो भी वह मांस खाते हैं, उसे दिया जाए,

29. देश में सीवर में घुसकर सफाई कामों को बिल्कुल बंद करके, अगले 100 दिनों में रोबॉट लगाए जाएं,

30. 12वीं पास करने के बाद, भारत के हर छात्र को दुनिया के किसी भी एक देश में एक हफ्ते का फ्री ट्रिप दिया जाए जिससे कि वह बाहर की दुनिया को देख सके, जैसा कि, इस्राइल, आदि देशों में होता है, और

31. जनसंख्या रोधक कानून बनाकर, अगले 50 वर्षों में केवल दो बच्चे पैदा करने की अनुमति का कानून बनना चाहिए।

हालांकि ऊपर लिखी गई मांगे बहुत कम हैं और ऐसी कई मांगे हैं जिनसे हमारे देश का सुधार हो सकता है। अच्छा हो कि सरकार इन मांगों को खुद ही मान ले। लेकिन अगर वह नहीं मानती तो वह खुद ही गुंजाइश छोड़ती है, कि देश में आगे भी बड़े आंदोलन होंगे। – निखिल सबलानिया

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