आंदोलन केवल जरिया है, अंतिम लक्ष्य नहीं – निखिल सबलानिया

हालांकि मैं लोगों की भावना की कद्र करता हूं लेकिन लोगों को और बातें भी बताना मैं अपना फर्ज समझता हूं। मैं 17 साल से ट्विटर (एक्स) और फेसबुक पर पोस्ट कर रहा हूं और दोनों पर एक लाख से ज्यादा पोस्ट करी होगी। पर मेरे तो ट्विटर पर सिर्फ डेढ़ हजार फॉलोअर्स भी नहीं है और फेसबुक पर फॉलोवर और फ्रेंड्स मिलकर कोई बारह हजार होंगे। पर अभिजीत दीपिके की एक ही पोस्ट पर चार दिन में एक करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स आ गए? इसका ऑडिट कौन करेगा कि यह फॉलोअर्स असली है या नकली है और क्या सोशल मीडिया कंपनियों को पैसे देकर आए हैं? ये सारी गेम कांग्रेस की है। समस्या यह है कि लीडरशिप एक गलत हाथ से निकलकर दूसरे गलत हाथ में चली जाएगी। दूसरी बात यह है कि मैं इस तरह के कामों को धोखेबाजी मानता हूं। हालांकि मैं तो इतने सारे मुद्दों पर वर्षों से लिखता ही आया हूं। और शायद जैसे की विलियम शेक्सपियर ने कहा था, कि यह दुनिया रंगमंच है जिसकी कठपुतलियां हम हैं, पर उनकी डोर ऊपर वाले से पहले नेताओं के हाथों में है। क्या विलियम शेक्सपियर भी भ्रष्ट था कि उसने हमें सच नहीं बताया। राजनीति! मनुष्य की चालाकी का एक दुर्लभ नमूना! लोगों की समस्याएं बहुत है और लोगों को भी कोई जरिया चाहिए अपनी समस्याओं का हल खोजने का और लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ता कि मौजूदा प्रोटेस्ट किस तरह से शुरू है। पर यह अबौद्धिक क्रिया है । इसमें आप शिकार हैं और आपको एक शिकारी दूसरे शिकारी के चंगुल से चुराकर अपने चंगुल में लेकर जा रहा है। क्योंकि दोनों ही शिकारीयों ने आपको बेवकूफ बनाकर अपने चंगुल में जकड़ा था। आपने उन्हें खुद नहीं चुना था। आपकी भावनाओं का फायदा उठाकर उन्होंने वोटिंग के जरिए आपको चुरा लिया था। अब आप बहुत ज्यादा परेशान हो तो दूसरा शिकारी आपकी परेशानी का फायदा उठाना चाहता है । यह शिकारी हैं क्योंकि यह ऐसे अपने चंगुल में फसाते हैं जैसे एक शिकारी एक भूखे जानवर को चारा दिखाकर अपने शिकंजे में जकड़ लेता है। मेरी औकात इतना ही कहने की है। आशा है कि आप मेरी बात पर गौर देंगे । मेरी शुभकामनाएं आपके आंदोलन के लिए और इसके लिए भी आपका और अधिक बौद्धिक विकास हो ।

निखिल सबलानिया Nikhil Sablania लेखक – दलित की गली, बुद्ध का पथ, डॉ. भीमराव आंबेडकर और बौद्ध धम्म, डॉ. भीमराव आंबेडकर जी की सचित्र कथा और कथन, अनुवादक – श्रम का विभाजन और निर्माण (कार्ल मार्क्स), अछूत और ईसाई धर्म, जाति का संहार, भारत में जातियाँ, शूद्र कौन थे और वे भारतीय आर्य समुदाय में चौथा वर्ण कैसे बनें (सभी – डाॅ. भीमराव आंबेडकर) 

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